NAI SUBEH

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मन्दोदरी का फिर रावण को समझाना और श्री राम की महिमा कहना

सयन करहु निज निज गृह जाईं। गवने भवन सकल सिर नाई॥मंदोदरी सोच उर बसेऊ। जब ते श्रवनपूर महि खसेऊ॥3॥   भावार्थ : अपने-अपने घर जाकर सो रहो (डरने की कोई बात नहीं है) तब सब लोग सिर नवाकर घर गए।…

अपनी ऊर्जा को अच्छे काम को पूरा करने में लगाना चाहिए

रवींद्रनाथ टैगोर महान कवि थे और उनका व्यक्तित्व भी बहुत निराला था। वे जो भी काम करते थे, उसे तपस्या मानकर करते थे। अपने काम में पूरी तरह डूब जाते थे। टैगोर के अच्छे कामों से और उनकी प्रसिद्धि से…

अगर हम भागेंगे तो विपत्तियां और ज्यादा बढ़ेंगी

स्वामी विवेकानंद काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए पहुंचे थे। उस समय मंदिर में कई बंदर थे। जब स्वामीजी मंदिर से बाहर निकल रहे थे, तब उनके पीछे बहुत सारे बंदर लग गए। स्वामीजी बंदरों से डरकर तेजी से आगे…

इस बार गुप्त नवरात्र 12 से 21 फरवरी तक

12 से 21 फरवरी तक माघ महीने की नवरात्रि रहेगी। इस बार गुप्त नवरात्र माता के पवित्र दिन शुक्रवार से शुरू हो रहे हैं। साथ ही कुंभ संक्रांति पर्व भी होने से इनका महत्व और ज्यादा बढ़ गया है। इस…

श्री रामजी के बाण से रावण के मुकुट-छत्रादि का गिरना

पवन तनय के बचन सुनि बिहँसे रामु सुजान।दच्छिन दिसि अवलोकि प्रभु बोले कृपा निधान॥12 ख॥   भावार्थ : पवनपुत्र हनुमान्‌जी के वचन सुनकर सुजान श्री रामजी हँसे। फिर दक्षिण की ओर देखकर कृपानिधान प्रभु बोले-॥12 (ख)॥   चौपाई : देखु…

सुबेल पर श्री रामजी की झाँकी और चंद्रोदय वर्णन

चौपाई : इहाँ सुबेल सैल रघुबीरा। उतरे सेन सहित अति भीरा॥सिखर एक उतंग अति देखी। परम रम्य सम सुभ्र बिसेषी॥1॥   भावार्थ : यहाँ श्री रघुवीर सुबेल पर्वत पर सेना की बड़ी भीड़ (बड़े समूह) के साथ उतरे। पर्वत का…

रावण को मन्दोदरी का समझाना, रावण-प्रहस्त संवाद

दोहा : बाँध्यो बननिधि नीरनिधि जलधि सिंधु बारीस।सत्य तोयनिधि कंपति उदधि पयोधि नदीस॥5॥   भावार्थ : वननिधि, नीरनिधि, जलधि, सिंधु, वारीश, तोयनिधि, कंपति, उदधि, पयोधि, नदीश को क्या सचमुच ही बाँध लिया?॥5॥   चौपाई : निज बिकलता बिचारि बहोरी॥ बिहँसि…

श्री रामजी का सेना सहित समुद्र पार उतरना, सुबेल पर्वत पर निवास, रावण की व्याकुलता

दोहा : सेतुबंध भइ भीर अति कपि नभ पंथ उड़ाहिं।अपर जलचरन्हि ऊपर चढ़ि चढ़ि पारहि जाहिं॥4॥   भावार्थ : सेतुबन्ध पर बड़ी भीड़ हो गई, इससे कुछ वानर आकाश मार्ग से उड़ने लगे और दूसरे (कितने ही) जलचर जीवों पर…

नल-नील द्वारा पुल बाँधना, श्री रामजी द्वारा श्री रामेश्वर की स्थापना

सोरठा : सिंधु बचन सुनि राम सचिव बोलि प्रभु अस कहेउ।अब बिलंबु केहि काम करहु सेतु उतरै कटकु॥   भावार्थ : समुद्र के वचन सुनकर प्रभु श्री रामजी ने मंत्रियों को बुलाकर ऐसा कहा- अब विलंब किसलिए हो रहा है?…

षष्ठ सोपान- मंगलाचरण

श्लोक : रामं कामारिसेव्यं भवभयहरणं कालमत्तेभसिंहंयोगीन्द्रं ज्ञानगम्यं गुणनिधिमजितं निर्गुणं निर्विकारम्‌।मायातीतं सुरेशं खलवधनिरतं ब्रह्मवृन्दैकदेवंवन्दे कन्दावदातं सरसिजनयनं देवमुर्वीशरूपम्‌॥1॥   भावार्थ : कामदेव के शत्रु शिवजी के सेव्य, भव (जन्म-मृत्यु) के भय को हरने वाले, काल रूपी मतवाले हाथी के लिए सिंह के…