NAI SUBEH
मन्दोदरी का फिर रावण को समझाना और श्री राम की महिमा कहना

सयन करहु निज निज गृह जाईं। गवने भवन सकल सिर नाई॥मंदोदरी सोच उर बसेऊ। जब ते श्रवनपूर महि खसेऊ॥3॥ भावार्थ : अपने-अपने घर जाकर सो रहो (डरने की कोई बात नहीं है) तब सब लोग सिर नवाकर घर गए।…


