NAI SUBEH

NAI SUBEH

क्या आपको लगता है बाटा एक भारतीय कंपनी है?

आज भारत में बाटा एक लोकप्रिय ब्रांड है। लेकिन, आपको लगता है कि यह एक भारतीय कंपनी है, तो आप गलत हैं। आइए हम आपको बता रहे हैं, इस्की रोचक कहानी! भारत में बाटा के जूते-चप्पल काफी लोकप्रिय हैं। इसके…

षष्ठ सोपान- रावण मूर्च्छा, रावण यज्ञ विध्वंस, राम-रावण युद्ध

दोहा : देखि पवनसुत धायउ बोलत बचन कठोर।आवत कपिहि हन्यो तेहिं मुष्टि प्रहार प्रघोर॥83॥   भावार्थ:- यह देखकर पवनपुत्र हनुमान्‌जी कठोर वचन बोलते हुए दौड़े। हनुमान्‌जी के आते ही रावण ने उन पर अत्यंत भयंकर घूँसे का प्रहार किया॥83॥  …

लक्ष्मण-रावण युद्ध

दोहा : निज दल बिकल देखि कटि कसि निषंग धनु हाथ।लछिमन चले क्रुद्ध होइ नाइ राम पद माथ॥82॥   भावार्थ:- अपनी सेना को व्याकुल देखकर कमर में तरकस कसकर और हाथ में धनुष लेकर श्री रघुनाथजी के चरणों पर मस्तक…

लंकाकाण्ड

लंकाकाण्ड लंकाकाण्ड में पुल निर्माण से राम-रावण युद्ध व अयोध्या वापसी तक के घटनाक्रम आते हैं। नीचे लंकाकाण्ड से जुड़े घटनाक्रमों की विषय सूची दी गई है। आप जिस भी घटना के बारे में पढ़ना चाहते हैं उसकी लिंक पर…

ये 11 सवाल विवेकानंद ने अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस से पूछे थे

रामकृष्ण परमहंस एक अद्भुत संत थे। उन्हें संत कहना गलत है, क्योंकि वे परमहंस थे। हिन्दू धर्म में परमहंस की उपाधि उसे दी जाती है, जो समाधि की अंतिम अवस्था में होता है। रामकृष्ण परमहंस ने दुनिया के सभी धर्मों…

रावण का युद्ध के लिए प्रस्थान और श्री रामजी का विजयरथ तथा वानर-राक्षसों का युद्ध

दोहा : * ताहि कि संपति सगुन सुभ सपनेहुँ मन बिश्राम।भूत द्रोह रत मोहबस राम बिमुख रति काम॥78॥   भावार्थ:- जो जीवों के द्रोह में रत है, मोह के बस हो रहा है, रामविमुख है और कामासक्त है, उसको क्या…

मेघनाद यज्ञ विध्वंस, युद्ध और मेघनाद उद्धार

चौपाई : मेघनाद कै मुरछा जागी। पितहि बिलोकि लाज अति लागी॥तुरत गयउ गिरिबर कंदरा। करौं अजय मख अस मन धरा॥1॥   भावार्थ:- मेघनाद की मूर्च्छा छूटी, (तब) पिता को देखकर उसे बड़ी शर्म लगी। मैं अजय (अजेय होने को) यज्ञ…

मेघनाद का युद्ध, रामजी का लीला से नागपाश में बँधना

दोहा : मेघनाद मायामय रथ चढ़ि गयउ अकास।गर्जेउ अट्टहास करि भइ कपि कटकहि त्रास॥72॥   भावार्थ:-मेघनाद उसी (पूर्वोक्त) मायामय रथ पर चढ़कर आकाश में चला गया और अट्टहास करके गरजा, जिससे वानरों की सेना में भय छा गया॥72॥   चौपाई…

कुम्भकर्ण युद्ध और उसकी परमगति

चौपाई : बंधु बचन सुनि चला बिभीषन। आयउ जहँ त्रैलोक बिभूषन॥नाथ भूधराकार सरीरा। कुंभकरन आवत रनधीरा॥1॥॥   भावार्थ:- भाई के वचन सुनकर विभीषण लौट गए और वहाँ आए, जहाँ त्रिलोकी के भूषण श्री रामजी थे। (विभीषण ने कहा-) हे नाथ!…

रावण का कुम्भकर्ण को जगाना, कुम्भकर्ण का रावण को उपदेश और विभीषण-कुम्भकर्ण संवाद

चौपाई : यह बृत्तांत दसानन सुनेऊ। अति बिषाद पुनि पुनि सिर धुनेऊ॥ब्याकुल कुंभकरन पहिं आवा। बिबिध जतन करि ताहि जगावा॥3॥   भावार्थ:- यह समाचार जब रावण ने सुना, तब उसने अत्यंत विषाद से बार-बार सिर पीटा। वह व्याकुल होकर कुंभकर्ण…