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उत्तरकाण्ड

उत्तरकाण्ड उत्तरकाण्ड में राज्याभिषेक से काकभुशुण्डि तक के घटनाक्रम आते हैं। नीचे उत्तरकाण्ड से जुड़े घटनाक्रमों की विषय सूची दी गई है। आप जिस भी घटना के बारे में पढ़ना चाहते हैं उसकी लिंक पर क्लिक करें। मंगलाचरण भरत विरह…

किस दिशा में विराजमान हैं कौन से दिगपाल

किसी भी महत्वपूर्ण पर्व पर सभी दिशाओं के देवताओं का आह्‍वान करके उनकी विधिवत पूजा करके के बाद ही त्योहार निमित्त पूजा कर आरंभ किया जाता है। आओ जानते हैं कि किसी दिशा में कौन से देवता स्थित हैं या…

विभीषण का राज्याभिषेक

चौपाई : आइ बिभीषन पुनि सिरु नायो। कृपासिंधु तब अनुज बोलायो॥तुम्ह कपीस अंगद नल नीला। जामवंत मारुति नयसीला॥1॥सब मिलि जाहु बिभीषन साथा। सारेहु तिलक कहेउ रघुनाथा॥पिता बचन मैं नगर न आवउँ। आपु सरिस कपि अनुज पठावउँ॥2॥   भावार्थ:-सब क्रिया-कर्म करने…

मन्दोदरी-विलाप, रावण की अन्त्येष्टि क्रिया

चौपाई : पति सिर देखत मंदोदरी। मुरुछित बिकल धरनि खसि परी॥जुबति बृंद रोवत उठि धाईं। तेहि उठाइ रावन पहिं आईं॥1॥   भावार्थ:- पति के सिर देखते ही मंदोदरी व्याकुल और मूर्च्छित होकर धरती पर गिर पड़ी। स्त्रियाँ रोती हुई दौड़ीं…

रावण का मूर्च्छा टूटना, राम-रावण युद्ध, रावण वध, सर्वत्र जयध्वनि

इहाँ अर्धनिसि रावनु जागा। निज सारथि सन खीझन लागा।सठ रनभूमि छड़ाइसि मोही। धिग धिग अधम मंदमति तोही॥4॥   भावार्थ:- यहाँ आधी रात को रावण (मूर्च्छा से) जागा और अपने सारथी पर रुष्ट होकर कहने लगा- अरे मूर्ख! तूने मुझे रणभूमि…

त्रिजटा-सीता संवाद

चौपाई : तेही निसि सीता पहिं जाई। त्रिजटा कहि सब कथा सुनाई॥सिर भुज बाढ़ि सुनत रिपु केरी। सीता उर भइ त्रास घनेरी॥1॥   भावार्थ:-उसी रात त्रिजटा ने सीताजी के पास जाकर उन्हें सब कथा कह सुनाई। शत्रु के सिर और…

घोरयुद्ध, रावण की मूर्च्छा

चौपाई : हाहाकार करत सुर भागे। खलहु जाहु कहँ मोरें आगे॥देखि बिकल सुर अंगद धायो। कूदि चरन गहि भूमि गिरायो॥4॥   भावार्थ:-देवता हाहाकार करते हुए भागे। (रावण ने कहा-) दुष्टों! मेरे आगे से कहाँ जा सकोगे? देवताओं को व्याकुल देखकर…

रावण-हनुमान्‌ युद्ध, रावण का माया रचना, रामजी द्वारा माया नाश

चौपाई : देखा श्रमित बिभीषनु भारी। धायउ हनूमान गिरि धारी॥रथ तुरंग सारथी निपाता। हृदय माझ तेहि मारेसि लाता॥1॥   भावार्थ:- विभीषण को बहुत ही थका हुआ देखकर हनुमान्‌जी पर्वत धारण किए हुए दौड़े। उन्होंने उस पर्वत से रावण के रथ,…

षष्ठ सोपान- रावण का विभीषण पर शक्ति छोड़ना, रामजी का शक्ति को अपने ऊपर लेना, विभीषण-रावण युद्ध

दोहा : पुनि दसकंठ क्रुद्ध होइ छाँड़ी सक्ति प्रचंड।चली बिभीषन सन्मुख मनहुँ काल कर दंड॥93॥   भावार्थ:- फिर रावण ने क्रोधित होकर प्रचण्ड शक्ति छोड़ी। वह विभीषण के सामने ऐसी चली जैसे काल (यमराज) का दण्ड हो॥93॥   चौपाई :…

इंद्र का श्री रामजी के लिए रथ भेजना, राम-रावण युद्ध

चौपाई : देवन्ह प्रभुहि पयादें देखा। उपजा उर अति छोभ बिसेषा॥सुरपति निज रथ तुरत पठावा। हरष सहित मातलि लै आवा॥1॥   भावार्थ:- देवताओं ने प्रभु को पैदल (बिना सवारी के युद्ध करते) देखा, तो उनके हृदय में बड़ा भारी क्षोभ…