NAI SUBEH

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यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम

दोहा : तब रघुबीर अनेक बिधि सखहि सिखावनु दीन्ह।।राम रजायसु सीस धरि भवन गवनु तेइँ कीन्ह॥111॥   भावार्थ:-तब श्री रामचन्द्रजी ने सखा गुह को अनेकों तरह से (घर लौट जाने के लिए) समझाया। श्री रामचन्द्रजी की आज्ञा को सिर चढ़ाकर…

तापस प्रकरण

तेहि अवसर एक तापसु आवा। तेजपुंज लघुबयस सुहावा॥कबि अलखित गति बेषु बिरागी। मन क्रम बचन राम अनुरागी॥4॥   भावार्थ:-उसी अवसर पर वहाँ एक तपस्वी आया, जो तेज का पुंज, छोटी अवस्था का और सुंदर था। उसकी गति कवि नहीं जानते…

प्रयाग पहुँचना, भरद्वाज संवाद, यमुनातीर निवासियों का प्रेम

दोहा : तब गनपति सिव सुमिरि प्रभु नाइ सुरसरिहि माथ।सखा अनुज सिय सहित बन गवनु कीन्ह रघुनाथ॥104॥   भावार्थ:-तब प्रभु श्री रघुनाथजी गणेशजी और शिवजी का स्मरण करके तथा गंगाजी को मस्तक नवाकर सखा निषादराज, छोटे भाई लक्ष्मणजी और सीताजी…

केवट का प्रेम और गंगा पार जाना

चौपाई : जासु बियोग बिकल पसु ऐसें। प्रजा मातु पितु जिइहहिं कैसें॥बरबस राम सुमंत्रु पठाए। सुरसरि तीर आपु तब आए॥1॥   भावार्थ:-जिनके वियोग में पशु इस प्रकार व्याकुल हैं, उनके वियोग में प्रजा, माता और पिता कैसे जीते रहेंगे? श्री…

लक्ष्मण-निषाद संवाद, श्री राम-सीता से सुमन्त्र का संवाद, सुमंत्र का लौटना

बोले लखन मधुर मृदु बानी। ग्यान बिराग भगति रस सानी॥काहु न कोउ सुख दुख कर दाता। निज कृत करम भोग सबु भ्राता॥2॥   भावार्थ:-तब लक्ष्मणजी ज्ञान, वैराग्य और भक्ति के रस से सनी हुई मीठी और कोमल वाणी बोले- हे…

अयोध्याकांड

अयोध्याकांड अयोध्याकांड में श्रीराम वनगमन से लेकर श्रीराम-भरत मिलाप तक के घटनाक्रम आते हैं। नीचे अयोध्याकांड से जुड़े घटनाक्रमों की विषय सूची दी गई है। आप जिस भी घटना के बारे में पढ़ना चाहते हैं उसकी लिंक पर क्लिक करें।…

श्री राम का श्रृंगवेरपुर पहुँचना, निषाद के द्वारा सेवा

दोहा : सुद्ध सच्चिदानंदमय कंद भानुकुल केतु।चरितकरत नर अनुहरत संसृति सागर सेतु॥87॥   भावार्थ:-शुद्ध (प्रकृतिजन्य त्रिगुणों से रहित, मायातीत दिव्य मंगलविग्रह) सच्चिदानंद-कन्द स्वरूप सूर्य कुल के ध्वजा रूप भगवान श्री रामचन्द्रजी मनुष्यों के सदृश ऐसे चरित्र करते हैं, जो संसार…

श्री राम-सीता-लक्ष्मण का वन गमन और नगर निवासियों को सोए छोड़कर आगे बढ़ना

दोहा : सजि बन साजु समाजु सबु बनिता बंधु समेत।बंदि बिप्र गुर चरन प्रभु चले करि सबहि अचेत॥79॥   भावार्थ:-वन का सब साज-सामान सजकर (वन के लिए आवश्यक वस्तुओं को साथ लेकर) श्री रामचन्द्रजी स्त्री (श्री सीताजी) और भाई (लक्ष्मणजी)…

स्वस्तिक बनाने के 11 चमत्कारिक लाभ 

स्वस्तिक का आविष्कार आर्यों ने किया था और धीरे धीरे यह पूरे विश्‍व में यह फैल गया। भारतीय संस्कृति में इसे बहुत ही शुभ, कल्याणकारी और मंगलकारी माना गया है। स्वस्तिक शब्द ‘सु’ और ‘अस्ति’ दोनों से मिलकर बना है।…

श्री रामजी, लक्ष्मणजी, सीताजी का महाराज दशरथ के पास विदा माँगने जाना, दशरथजी का सीताजी को समझाना

सचिवँ उठाइ राउ बैठारे। कहि प्रिय बचन रामु पगु धारे॥सिय समेत दोउ तनय निहारी। ब्याकुल भयउ भूमिपति भारी॥4॥   भावार्थ:-‘श्री रामजी पधारे हैं’, ये प्रिय वचन कहकर मंत्री ने राजा को उठाकर बैठाया। सीता सहित दोनों पुत्रों को (वन के…