NAI SUBEH
यमुना को प्रणाम, वनवासियों का प्रेम

दोहा : तब रघुबीर अनेक बिधि सखहि सिखावनु दीन्ह।।राम रजायसु सीस धरि भवन गवनु तेइँ कीन्ह॥111॥ भावार्थ:-तब श्री रामचन्द्रजी ने सखा गुह को अनेकों तरह से (घर लौट जाने के लिए) समझाया। श्री रामचन्द्रजी की आज्ञा को सिर चढ़ाकर…


