NAI SUBEH

NAI SUBEH

संत-असंत वंदना

संत-असंत वंदना बंदउँ संत असज्जन चरना। दुःखप्रद उभय बीच कछु बरना॥बिछुरत एक प्रान हरि लेहीं। मिलत एक दुख दारुन देहीं॥2॥   भावार्थ:-अब मैं संत और असंत दोनों के चरणों की वन्दना करता हूँ, दोनों ही दुःख देने वाले हैं, परन्तु…

खल वंदना

खल वंदना चौपाई : बहुरि बंदि खल गन सतिभाएँ। जे बिनु काज दाहिनेहु बाएँ॥पर हित हानि लाभ जिन्ह केरें। उजरें हरष बिषाद बसेरें॥1॥   भावार्थ:-अब मैं सच्चे भाव से दुष्टों को प्रणाम करता हूँ, जो बिना ही प्रयोजन, अपना हित…

ब्राह्मण-संत वंदना

ब्राह्मण-संत वंदना बंदउँ प्रथम महीसुर चरना। मोह जनित संसय सब हरना॥सुजन समाज सकल गुन खानी। करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी॥2॥   भावार्थ:-पहले पृथ्वी के देवता ब्राह्मणों के चरणों की वन्दना करता हूँ, जो अज्ञान से उत्पन्न सब संदेहों को हरने वाले…

गुरु वंदना

गुरु वंदना बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि।महामोह तम पुंज जासु बचन रबि कर निकर॥5॥   भावार्थ:-मैं उन गुरु महाराज के चरणकमल की वंदना करता हूँ, जो कृपा के समुद्र और नर रूप में श्री हरि ही हैं…

मंगलाचरण

प्रथम सोपान-मंगलाचरण श्लोक : वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि।मंगलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ॥1॥   भावार्थ:-अक्षरों, अर्थ समूहों, रसों, छन्दों और मंगलों को करने वाली सरस्वतीजी और गणेशजी की मैं वंदना करता हूँ॥1॥   भवानीशंकरौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ।याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम्‌॥2॥  …

श्रीरामचरितमानस: बालकाण्ड

बालकाण्ड बालकाण्ड में प्रभु राम के जन्म से लेकर राम-विवाह तक के घटनाक्रम आते हैं। नीचे बालकाण्ड से जुड़े घटनाक्रमों की विषय सूची दी गई है। आप जिस भी घटना के बारे में पढ़ना चाहते हैं, उसकी लिंक पर क्लिक…

श्रीरामचरितमानस: श्रीरामायण जी की आरती  

आरती : आरती श्रीरामायणजी की। कीरति कलित ललित सिय पी की।।गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद। बालमीक बिग्यान बिसारद।।सुक सनकादि सेष अरु सारद। बरनि पवनसुत की‍रति नीकी।।गावत बेद पुरान अष्टदस। छओ सास्त्र सब ग्रंथन को रस।।मुनि जन धन संतन को सरबस। सार…

मध्यप्रदेश में अनलॉक शिक्षा के मंदिर:प्राइवेट और सरकारी स्कूल 21 सितंबर से खुलेंगे

मध्यप्रदेश में अनलॉक शिक्षा के मंदिर:प्राइवेट और सरकारी स्कूल 21 सितंबर से खुलेंगे, क्लास नहीं लगेंगी, लेकिन शिक्षकों को रोज आना होगा; कंटेनमेंट जोन में प्रतिबंध रहेगा टीचर से मार्गदर्शन लेने के लिए छात्र पालकों की अनुमति लेने के बाद…

‘ये हैं तुम्हारे ब्राह्मण ! जिन्हें ब्रह्म देवता कहा जाता है ?’

Bramhan

अकबर ने एक ब्राह्मण को दयनीय हालत में जब भिक्षाटन करते देखा तो बीरबल की ओर व्यंग्य कसकर बोले – ‘बीरबल ! ये हैं तुम्हारे ब्राह्मण ! जिन्हें ब्रह्म देवता के रुप में जाना जाता है । ये तो भिखारी…

मदद: ऐसा लगा जैसे मैंने ईश्वर से बात की हो !

एक दिन सवेरे आठ बजे मैं अपने शहर से दूसरे शहर जाने के लिए निकला। मैं रेलवे स्टेशन पँहुचा, पर देरी से पँहुचने के कारण मेरी ट्रेन निकल चुकी थी। मेरे पास दोपहर की ट्रेन के अलावा कोई चारा नहीं…