NAI SUBEH

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बारात का जनकपुर में आना और स्वागतादि

चौपाई : कनक कलस भरि कोपर थारा। भाजन ललित अनेक प्रकारा॥भरे सुधा सम सब पकवाने। नाना भाँति न जाहिं बखाने॥1॥   भावार्थ:-(दूध, शर्बत, ठंडाई, जल आदि से) भरकर सोने के कलश तथा जिनका वर्णन नहीं हो सकता ऐसे अमृत के…

दशरथजी के पास जनकजी का दूत भेजना, अयोध्या से बारात का प्रस्थान

दोहा : तदपि जाइ तुम्ह करहु अब जथा बंस ब्यवहारु।बूझि बिप्र कुलबृद्ध गुर बेद बिदित आचारु॥286॥   भावार्थ:-तथापि तुम जाकर अपने कुल का जैसा व्यवहार हो, ब्राह्मणों, कुल के बूढ़ों और गुरुओं से पूछकर और वेदों में वर्णित जैसा आचार…

श्री राम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद

चौपाई : नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥आयसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही॥1॥   भावार्थ:-हे नाथ! शिवजी के धनुष को तोड़ने वाला आपका कोई एक दास ही होगा। क्या आज्ञा है, मुझसे क्यों नहीं…

अदृश्य आशीष: बहू, ज़रा मेरा चश्मा तो साफ़ कर दो

बच्चों के प्रति स्नेह रखने वाले माता पिता के समर्पण एवं त्याग से जुड़ी हुई एक बोध कथा जो भटके हुए बच्चों का मार्ग प्रशस्त करती है जल्दी -जल्दी घर के सारे काम निपटा, बेटे को स्कूल छोड़ते हुए ऑफिस…

नवरात्री माता ब्रह्मचारिणी (Navratri Mata Brahmacharini)

नवरात्री  दुर्गा पूजा दूसरे तिथि – माता ब्रह्मचारिणी की पूजा : नवरात्र के दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना का विधान है.  देवी दुर्गा का यह दूसरा रूप भक्तों एवं सिद्धों को अमोघ फल देने वाला है. देवी ब्रह्मचारिणी की उपासना से तप, त्याग, वैराग्य,…

मोक्षसंन्यासयोग- अठारहवाँ अध्याय

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अथाष्टादशोऽध्यायः- मोक्षसंन्यासयोग (त्याग का विषय) अर्जुन उवाच   सन्न्यासस्य महाबाहो तत्त्वमिच्छामि वेदितुम्‌ । त्यागस्य च हृषीकेश पृथक्केशिनिषूदन ॥   भावार्थ : अर्जुन बोले- हे महाबाहो! हे अन्तर्यामिन्‌! हे वासुदेव! मैं संन्यास और त्याग के तत्व को पृथक्‌-पृथक्‌ जानना चाहता हूँ…

श्रद्धात्रयविभागयोग- सत्रहवाँ अध्याय

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अथ सप्तदशोऽध्यायः- श्रद्धात्रयविभागयोग (श्रद्धा का और शास्त्रविपरीत घोर तप करने वालों का विषय) अर्जुन उवाच   ये शास्त्रविधिमुत्सृज्य यजन्ते श्रद्धयान्विताः। तेषां निष्ठा तु का कृष्ण सत्त्वमाहो रजस्तमः॥   भावार्थ : अर्जुन बोले- हे कृष्ण! जो मनुष्य शास्त्र विधि को त्यागकर…

दैवासुरसम्पद्विभागयोग- सोलहवाँ अध्याय

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अथ षोडशोऽध्यायः- दैवासुरसम्पद्विभागयोग (फलसहित दैवी और आसुरी संपदा का कथन) श्रीभगवानुवाच   अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः। दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम्‌॥   भावार्थ : श्री भगवान बोले- भय का सर्वथा अभाव, अन्तःकरण की पूर्ण निर्मलता, तत्त्वज्ञान के लिए ध्यान योग में निरन्तर…

माँ के नवरात्रि की महिमा

नवरात्रि उत्सव के बारे में जानिए नवरात्रि का त्योहार अश्विन (शरद) या चैत्र (वसंत) की शुरुआत में प्रार्थना और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह समय आत्म निरीक्षण और अपने स्रोत की ओर वापिस जाने का समय है। परिवर्तन…

नवरात्रि: माता शैलपुत्री (Navratri: Mata Shailputri)

नवरात्री  दुर्गा पूजा पहले तिथि – माता शैलपुत्री की पूजा मां दुर्गा शक्ति की उपासना का पर्व शारदीय नवरात्र प्रतिपदा से नवमी तक सनातन काल से मनाया जाता रहा है. आदि-शक्ति के हर रूप की नवरात्र के नौ दिनों में पूजा की जाती है. अत: इसे…