NAI SUBEH
पुष्पवाटिका-निरीक्षण, सीताजी का प्रथम दर्शन, श्री सीता-रामजी का परस्पर दर्शन

दोहा : उठे लखनु निसि बिगत सुनि अरुनसिखा धुनि कान।गुर तें पहिलेहिं जगतपति जागे रामु सुजान॥226॥ भावार्थ:-रात बीतने पर, मुर्गे का शब्द कानों से सुनकर लक्ष्मणजी उठे। जगत के स्वामी सुजान श्री रामचन्द्रजी भी गुरु से पहले ही जाग…

