NAI SUBEH

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श्री सीताजी का यज्ञशाला में प्रवेश

दोहा : जानि सुअवसरु सीय तब पठई जनक बोलाइ।चतुर सखीं सुंदर सकल सादर चलीं ‍िलवाइ॥246॥   भावार्थ:-तब सुअवसर जानकर जनकजी ने सीताजी को बुला भेजा। सब चतुर और सुंदर सखियाँ आरदपूर्वक उन्हें लिवा चलीं॥246॥   चौपाई : सिय सोभा नहिं…

श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश

चौपाई : सीय स्वयंबरू देखिअ जाई। ईसु काहि धौं देइ बड़ाई॥लखन कहा जस भाजनु सोई। नाथ कृपा तव जापर होई॥1॥   भावार्थ:-चलकर सीताजी के स्वयंवर को देखना चाहिए। देखें ईश्वर किसको बड़ाई देते हैं। लक्ष्मणजी ने कहा- हे नाथ! जिस…

श्री सीताजी का पार्वती पूजन एवं वरदान प्राप्ति तथा राम-लक्ष्मण संवाद

दोहा : देखन मिस मृग बिहग तरु फिरइ बहोरि बहोरि।निरखि निरखि रघुबीर छबि बाढ़इ प्रीति न थोरि॥234॥   भावार्थ:-मृग, पक्षी और वृक्षों को देखने के बहाने सीताजी बार-बार घूम जाती हैं और श्री रामजी की छबि देख-देखकर उनका प्रेम कम…

बात-बात पर गुस्सा करना आपका कई तरह से नुकसान करता है

ऐसी 5 चीजें हैं जो गुस्सा करने वाले लोग अक्सर खो देते हैं भगवान कृष्ण से सीख सकते हैं कि बिना गुस्सा किए भी कैसे अपना काम सही तरीके से किया जा सकता है क्या आप जानते हैं कि गुस्सा…

अधिक मास की एकादशी : इसको करने से मिलता है सभी यज्ञों का फल

अधिक मास के कृष्णपक्ष की एकादशी को पुरुषोत्तमी एकादशी कहते हैं। काशी के ज्योतिषाचार्य और धर्म ग्रंथों के जानकार पं. गणेश मिश्र का कहना है कि 3 साल में आने वाली ये एकादशी बहुत ही खास होती है। इस दिन…

संतुष्टि के बिना मन को शांति नहीं मिल सकती है

जिस व्यक्ति के मन में सिर्फ प्रश्न ही प्रश्न होते हैं, उसे कभी भी उन प्रश्नों के उत्तर सुनाई नहीं देंगे, ऐसे लोग हमेशा अशांत ही रहते हैं जहां असंतुष्टि रहती है, वहां हमेशा ही अशांति रहती है। अशांत व्यक्ति…

सुन्दर विचार 

सुन्दर विचार 

-“छोटी-छोटी बातों में आनंद खोजना चाहिए, क्योंकि बड़ी-बड़ी बातें तो जीवन में कुछ ही होती हैं।” -“यह आवश्यक नहीं कि हर लड़ाई जीती ही जाए। आवश्यक तो यह है कि हर हार से कुछ सीखा जाए।” -“एक मुँह और दो…

किन छह को कभी छोटा यानी कमजोर नहीं समझना चाहिए

श्री रामचरित मानस के अरण्यकांड में जब शूर्पणखा लक्ष्मण द्वारा नाक, कान काटे जाने के बाद रावण के पास जाती है, तब वह रावण को बताती है कि किन छह को कभी छोटा यानी कमजोर नहीं समझना चाहिए। आज हम…

कर्म और व्यवहार

एक बार एक राजा ने विद्वान ज्योतिषियों की सभा बुलाकर प्रश्न किया। मेरी जन्म पत्रिका के अनुसार मेरा राजा बनने का योग था मैं राजा बना, किन्तु उसी घड़ी मुहूर्त में अनेक जातकों ने जन्म लिया होगा जो राजा नहीं…

तुलसी माता की दो सेवायें करते रहना चाहिए 

प्रथम सेवा – तुलसी माता की जड़ो में प्रतिदिन जल अर्पण करते रहना चहिये केवल एकादशी को छोड़ कर। द्वितीय सेवा -तुलसी की मंजरियों को तोड़कर तुलसी को पीड़ा मुक्त करते रहना , क्योंकि ~ ये मंजरियाँ तुलसी जी को…