NAI SUBEH
श्री सीताजी का यज्ञशाला में प्रवेश

दोहा : जानि सुअवसरु सीय तब पठई जनक बोलाइ।चतुर सखीं सुंदर सकल सादर चलीं िलवाइ॥246॥ भावार्थ:-तब सुअवसर जानकर जनकजी ने सीताजी को बुला भेजा। सब चतुर और सुंदर सखियाँ आरदपूर्वक उन्हें लिवा चलीं॥246॥ चौपाई : सिय सोभा नहिं…







