NAI SUBEH

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अवतार के हेतु

अवतार के हेतु सोरठा : सुनु सुभ कथा भवानि रामचरितमानस बिमल।कहा भुसुंडि बखानि सुना बिहग नायक गरुड़॥120 ख॥   भावार्थ:-हे पार्वती! निर्मल रामचरितमानस की वह मंगलमयी कथा सुनो जिसे काकभुशुण्डि ने विस्तार से कहा और पक्षियों के राजा गरुड़जी ने…

महाराष्ट्र का वह गाँव जिसने देश को दीं कई मीठी यादें और विभिन्न टॉफ़ी : रावलगाँव

बचपन में मेरी सबसे मीठी यादें एक 50 वर्षीय चाचा से जुड़ी हुई है, वह चलने और बोलने में सक्षम नहीं थे, लेकिन हर शाम वह अपने व्हीलचेयर से चहलकदमी करने के लिए निकलते थे। वह बच्चों के लिए किसी…

शिव-पार्वती संवाद

शिव-पार्वती संवाद दोहा : जटा मुकुट सुरसरित सिर लोचन नलिन बिसाल।नीलकंठ लावन्यनिधि सोह बालबिधु भाल॥106॥   भावार्थ:-उनके सिर पर जटाओं का मुकुट और गंगाजी (शोभायमान) थीं। कमल के समान बड़े-बड़े नेत्र थे। उनका नील कंठ था और वे सुंदरता के…

शिवजी का विवाह

शिवजी का विवाह दोहा : मुनि अनुसासन गनपतिहि पूजेउ संभु भवानि।कोउ सुनि संसय करै जनि सुर अनादि जियँ जानि॥100॥   भावार्थ:-मुनियों की आज्ञा से शिवजी और पार्वतीजी ने गणेशजी का पूजन किया। मन में देवताओं को अनादि समझकर कोई इस…

शिवजी की विचित्र बारात और विवाह की तैयारी

शिवजी की विचित्र बारात और विवाह की तैयारी दोहा : लगे सँवारन सकल सुर बाहन बिबिध बिमान।होहिं सगुन मंगल सुभद करहिं अपछरा गान॥91॥   भावार्थ:-सब देवता अपने भाँति-भाँति के वाहन और विमान सजाने लगे, कल्याणप्रद मंगल शकुन होने लगे और…

देवताओं का शिवजी से ब्याह के लिए प्रार्थना करना, सप्तर्षियों का पार्वती के पास जाना

देवताओं का शिवजी से ब्याह के लिए प्रार्थना करना, सप्तर्षियों का पार्वती के पास जाना दोहा : सकल सुरन्ह के हृदयँ अस संकर परम उछाहु।निज नयनन्हि देखा चहहिं नाथ तुम्हार बिबाहु॥88॥   भावार्थ:-हे शंकर! सब देवताओं के मन में ऐसा…

रति को वरदान

रति को वरदान दोहा : अब तें रति तव नाथ कर होइहि नामु अनंगु।बिनु बपु ब्यापिहि सबहि पुनि सुनु निज मिलन प्रसंगु॥87॥   भावार्थ:-हे रति! अब से तेरे स्वामी का नाम अनंग होगा। वह बिना ही शरीर के सबको व्यापेगा।…

कामदेव का देवकार्य के लिए जाना और भस्म होना

कामदेव का देवकार्य के लिए जाना और भस्म होना दोहा : सुरन्ह कही निज बिपति सब सुनि मन कीन्ह बिचार।संभु बिरोध न कुसल मोहि बिहसि कहेउ अस मार॥83॥   भावार्थ:-देवताओं ने कामदेव से अपनी सारी विपत्ति कही। सुनकर कामदेव ने…

सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वतीजी का महत्व

सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वतीजी का महत्व चौपाई : रिषिन्ह गौरि देखी तहँ कैसी। मूरतिमंत तपस्या जैसी॥बोले मुनि सुनु सैलकुमारी। करहु कवन कारन तपु भारी॥1॥   भावार्थ:-ऋषियों ने (वहाँ जाकर) पार्वती को कैसी देखा, मानो मूर्तिमान्‌ तपस्या ही हो। मुनि…

श्री रामजी का शिवजी से विवाह के लिए अनुरोध

श्री रामजी का शिवजी से विवाह के लिए अनुरोध दोहा : अब बिनती मम सुनहु सिव जौं मो पर निज नेहु।जाइ बिबाहहु सैलजहि यह मोहि मागें देहु॥76॥   भावार्थ:-(फिर उन्होंने शिवजी से कहा-) हे शिवजी! यदि मुझ पर आपका स्नेह…