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पार्वती का जन्म और तपस्या

पार्वती का जन्म और तपस्या सतीं मरत हरि सन बरु मागा। जनम जनम सिव पद अनुरागा॥तेहि कारन हिमगिरि गृह जाई। जनमीं पारबती तनु पाई॥3॥ भावार्थ:-सती ने मरते समय भगवान हरि से यह वर माँगा कि मेरा जन्म-जन्म में शिवजी…

पार्वती का जन्म और तपस्या सतीं मरत हरि सन बरु मागा। जनम जनम सिव पद अनुरागा॥तेहि कारन हिमगिरि गृह जाई। जनमीं पारबती तनु पाई॥3॥ भावार्थ:-सती ने मरते समय भगवान हरि से यह वर माँगा कि मेरा जन्म-जन्म में शिवजी…

पति के अपमान से दुःखी होकर सती का योगाग्नि से जल जाना, दक्ष यज्ञ विध्वंस दोहा : सिव अपमानु न जाइ सहि हृदयँ न होइ प्रबोध।सकल सभहि हठि हटकि तब बोलीं बचन सक्रोध॥63॥ भावार्थ:-परन्तु उनसे शिवजी का अपमान सहा…

सती का दक्ष यज्ञ में जाना दोहा : दच्छ लिए मुनि बोलि सब करन लगे बड़ जाग।नेवते सादर सकल सुर जे पावत मख भाग॥60॥ भावार्थ:-दक्ष ने सब मुनियों को बुला लिया और वे बड़ा यज्ञ करने लगे। जो देवता…

शिवजी द्वारा सती का त्याग, शिवजी की समाधि दोहा : परम पुनीत न जाइ तजि किएँ प्रेम बड़ पापु।प्रगटि न कहत महेसु कछु हृदयँ अधिक संतापु॥56॥ भावार्थ:-सती परम पवित्र हैं, इसलिए इन्हें छोड़ते भी नहीं बनता और प्रेम करने…

सती का भ्रम, श्री रामजी का ऐश्वर्य और सती का खेद रामकथा ससि किरन समाना। संत चकोर करहिं जेहि पाना॥ऐसेइ संसय कीन्ह भवानी। महादेव तब कहा बखानी॥4॥ भावार्थ:-श्री रामजी की कथा चंद्रमा की किरणों के समान है, जिसे संत…

याज्ञवल्क्य-भरद्वाज संवाद तथा प्रयाग माहात्म्य अब रघुपति पद पंकरुह हियँ धरि पाइ प्रसाद।कहउँ जुगल मुनिबर्य कर मिलन सुभग संबाद ॥43 ख॥ भावार्थ:-मैं अब श्री रघुनाथजी के चरण कमलों को हृदय में धारण कर और उनका प्रसाद पाकर दोनों श्रेष्ठ…

दूसरों की बुराई करना भी एक पाप माना गया है। कुछ लोग अपनी चीजों को महत्व नहीं देते और दूसरों के सुख से ईर्ष्या करते हैं। जो लोग ये काम करते हैं, वे अशांत रहते हैं। इस बुराई से बचने…

भगत सिंह जी का जन्म: 28 सितम्बर 1907, एवं उनकी मृत्यु:23 मार्च 1931 भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी क्रांतिकारी थे। चन्द्रशेखर आजाद व पार्टी के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर इन्होंने देश की आज़ादी के लिए अभूतपूर्व साहस के साथ शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार का मुक़ाबला…

भारत की सबसे लोकप्रिय और आदरणीय गायिका हैं, जिनका छ: दशकों का कार्यकाल उपलब्धियों से भरा पड़ा है। हालाँकि लता जी ने लगभग तीस से ज्यादा भाषाओं में फ़िल्मी और गैर-फ़िल्मी गाने गाये हैं लेकिन उनकी पहचान भारतीय सिनेमा में एक पार्श्वगायक के रूप…

मानस का रूप और माहात्म्य दोहा : जस मानस जेहि बिधि भयउ जग प्रचार जेहि हेतु।अब सोइ कहउँ प्रसंग सब सुमिरि उमा बृषकेतु॥35॥ भावार्थ:-यह रामचरित मानस जैसा है, जिस प्रकार बना है और जिस हेतु से जगत में इसका…