NAI SUBEH

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रावण पुत्र मेघनाद की पत्नी सती सुलोचना की कथा

sulochana

सुलोचना वासुकी नाग की पुत्री और लंका के राजा रावण के पुत्र मेघनाद की पत्नी थी। लक्ष्मण के साथ हुए एक भयंकर युद्ध में मेघनाद का वध हुआ। उसके कटे हुए शीश को भगवान श्रीराम के शिविर में लाया गया…

समस्त पाप नाशक स्तोत्र

नई सुबेह-संछिप्त समाचार

भगवन वेदव्यासजी द्वारा रचित अठारह पुराणों में से एक ‘अग्नि पुराण’ में अग्निदेव द्वारा महर्षि वशिष्ठ को दियें गये विभिन्न उपदेश हैं| इसीके अंतर्गत इस पापनाशक स्तोत्र के बारे में महात्मा पुष्कर कहते हैं कि मनुष्य चित्त की मलिनता चोरी,…

पवित्र शंख का महत्व व लाभ

हिन्दू धर्म में प्रत्येक मांगलिक कार्य के अवसर पर शंख बजाना अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। साथ ही इसके अनेक वैज्ञानिक लाभ भी हैं, जो शंख बजाने वाले को अनायास ही प्राप्त हो जाते हैं। अगर दिन की…

क्या तुमने दशावतार के बारे में सुना है?

Dasavtar-NAI SUBEH

एक माँ अपने पूजा-पाठ से फुर्सत पाकर अपने विदेश में रहने वाले बेटे से फोन पर बात करते समय पूँछ बैठी: … बेटा! कुछ पूजा-पाठ भी करते हो या फुर्सत ही नहीं मिलती?   बेटे ने माँ को बताया –…

“मानसी पूजा”

"मानसी पूजा"

बाह्य पूजा को कई गुना अधिक फलदायी बनाने के लिए शास्त्रों में एक उपाय बतलाया गया है, वह है–मानसी-पूजा। वस्तुत: भगवान को किसी वस्तु की आवश्यकता नहीं है, वे तो भाव के भूखे हैं, इसलिए पुराणों में मानसी-पूजा का विशेष…

रुद्राक्ष के महत्व, लाभ और धारण विधि

Rudraksha

एक मुखी रुद्राक्ष   इसके मुख्य ग्रह सूर्य होते हैं। इसे धारण करने से हृदय रोग, नेत्र रोग, सिर दर्द का कष्ट दूर होता है। चेतना का द्वार खुलता है, मन विकार रहित होता है और भय मुक्त रहता है।…

पूजा पाठ में आचमन का महत्त्व

पूजा पाठ में आचमन का महत्त्व

पूजा, यज्ञ आदि आरंभ करने से पूर्व शुद्धि के लिए मंत्र पढ़ते हुए जल पीना ही आचमन कहलाता है। इससे मन और हृदय की शुद्धि होती है।   यह जल आचमन का जल कहलाता है। इस जल को तीन बार…

जब दो रिश्तेदारों में विवाद हो जाए तब हमें मौन रहना चाहिए, रिश्ते टूट सकते हैं

संबंध कैसे निभाए जाते हैं, ये हम श्रीकृष्ण से सीख सकते हैं। श्रीकृष्ण के पौते अनिरुद्ध के विवाह की घटना है। उस समय यदुवंशी बारात लेकर भोजकट नगर गए थे। विवाह के समय श्रीकृष्ण के साले यानी रुक्मिणी के भाई…

गुरु नानक देव (551 वां प्रकाश पर्व )

अकालपुरख की व्यवस्था दुनिया के सुधार के लिए इस धरती पर हमारे ही बीच से ऐसे महामानव पैदा करती है जो प्रभु की बंदगी कायम करते हैं और सामाजिक कुरीतियों को खत्म करते हैं।इस संबंध में हिन्दुस्तान की धरती को…

तृतीय सोपान-मंगलाचरण

श्लोक : मूलं धर्मतरोर्विवेकजलधेः पूर्णेन्दुमानन्ददंवैराग्याम्बुजभास्करं ह्यघघनध्वान्तापहं तापहम्‌।मोहाम्भोधरपूगपाटनविधौ स्वःसम्भवं शंकरंवंदे ब्रह्मकुलं कलंकशमनं श्री रामभूपप्रियम्‌॥1॥   भावार्थ : धर्म रूपी वृक्ष के मूल, विवेक रूपी समुद्र को आनंद देने वाले पूर्णचन्द्र, वैराग्य रूपी कमल के (विकसित करने वाले) सूर्य, पाप रूपी घोर…